परम सुंदरी समीक्षा: सिद्धार्थ-जाह्नवी की शानदार केमिस्ट्री और मनमोहक लोकेशन भी फीकी कहानी को संभाल नहीं पाई।

बॉलीवुड की मौजूदा फिल्मों में एक बड़ी समस्या साफ झलकती है – मौलिकता की कमी। नए कॉन्सेप्ट पर काम करने की बजाय मेकर्स या तो पुरानी फिल्मों का रीमेक बना रहे हैं या फिर हिट फिल्मों की झलकियां जोड़कर नई पैकेजिंग कर देते हैं। ‘परम सुंदरी’ इसका ताज़ा उदाहरण है, जिसे देखते वक्त कई बार आपको ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और ‘टू स्टेट्स’ जैसी फिल्मों की याद आने लगती है। अफसोस की बात यह है कि इतने रेफरेंस लेने के बावजूद फिल्म आपको बांध पाने में नाकाम रहती है।

‘परम सुंदरी’ की सबसे बड़ी कमी इसका कमजोर लेखन है। कहानी में इमोशन, रोमांस, ड्रामा और कॉमेडी के लिए काफी स्पेस था, लेकिन स्क्रिप्ट में ऐसे सीन ही नहीं लिखे गए जो हंसी दिला सकें, रोमांस में गहराई ला सकें या इमोशनल सीन में जुड़ाव बना सकें। यही वजह है कि फिल्म का सफर सपाट लगता है और दर्शकों को जोड़ पाने की ताकत इसमें नज़र नहीं आती।

कहानी की शुरुआत परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) से होती है, जो दिल्ली का एक टेक-सेवी युवक है। वह एक डेटिंग एप लॉन्च करने की सोचता है जो यह बताएगा कि इंसान की परफेक्ट सोलमेट कौन है। एप टेस्ट करने के लिए वह अपना प्रोफाइल बनाता है और रिजल्ट आता है कि उसकी सोलमेट केरल के एक छोटे गांव में रहने वाली सुंदरी (जाह्नवी कपूर) है।

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