चुनावी रंजिश में हुई हत्या, हमीरपुर में विशेष न्यायाधीश ने दो सगे भाइयों सहित पांच को सुनाई उम्रकैद की सज़ा, एक बरी

हमीरपुर ज़िले की राठ कोतवाली क्षेत्र के मवई गांव में साढ़े चार साल पहले चुनावी रंजिश में हुई हत्या के मामले में मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (डकैती कोर्ट) अनिल कुमार खरवार ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने दो सगे भाइयों और उनके परिजनों समेत पांच आरोपियों को आजीवन कारावास और 45-45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि एक महिला आरोपी को दोषमुक्त कर रिहा कर दिया गया।

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मणिकर्ण शुक्ल और एडीजीसी सुभाष श्रीवास्तव ने बताया कि राठ कोतवाली में मवई निवासी चंद्रकरन पुत्र भागीरथ ने 27 नवंबर 2021 को तहरीर देकर बताया था कि उसका भाई अर्जुन अपने भाइयों धर्मपाल और सरोवर के साथ खेत में बने मकान में रहता था।

घटना के दिन सुबह करीब 10 बजे चंद्रकरन अपने भाई बृजकिशोर और रविंद्र (निवासी धमना) के साथ अर्जुन को खाना देने खेत जा रहा था। वहां पहुंचने पर देखा कि गांव के रामकिशोरी, उसके पुत्र धीरेंद्र उर्फ धीर सिंह, वीर सिंह, अरविंद, भाई रामभरत, भतीजा शत्रुघ्न सिंह और पत्नी संपतरानी अर्जुन, धर्मपाल और सरोवर पर कुल्हाड़ी, हंसिया और डंडों से हमला कर रहे थे।

बताया गया कि प्रधानी चुनाव को लेकर दोनों पक्षों में रंजिश चली आ रही थी। ललकारने पर सभी आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। घायलों को एंबुलेंस से सीएचसी राठ ले जाया गया, जहां से मेडिकल कॉलेज उरई रेफर कर दिया गया। उरई पहुंचने पर डॉक्टरों ने अर्जुन को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर सात लोगों के खिलाफ हत्या व जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रामकिशोरी, उसके पुत्र धीरेंद्र उर्फ धीर सिंह और वीर सिंह, भाई रामभरत व भतीजे शत्रुघ्न सिंह को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

मुकदमे के दौरान रामकिशोरी के तीसरे पुत्र अरविंद की मृत्यु हो गई थी। वहीं उसकी पत्नी संपतरानी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर रिहा कर दिया गया।

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