हमीरपुर। जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान दुश्मनों से मुठभेड़ में शहीद हुए भारतीय सेना के नायक गोविंद सिंह यादव का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। बुधवार को कुरारा थाना क्षेत्र के कुसमरा गांव स्थित श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां छोटे भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी तो मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो उठीं।
हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र के कुसमरा निवासी 30 वर्षीय गोविंद सिंह यादव पुत्र कुंवर सिंह वर्ष 2013 में भारतीय सेना में नायक के पद पर भर्ती हुए थे और जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। 22/23 नवंबर को एक ऑपरेशन के दौरान दुश्मन की गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। सेना की ओर से सूचना मिलने के बाद से ही परिवार और गांव में मातम पसर गया था।मंगलवार देर शाम जब सेना के वाहन से तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो सैकड़ों बाइक और कारों का काफिला साथ था। युवाओं ने हाथों में तिरंगा थामकर भारत माता की जय और शहीद अमर रहे के नारे लगाते हुए शव यात्रा में भाग लिया। देर रात तक चले अंतिम दर्शन के कारण उसी दिन अंतिम संस्कार नहीं हो सका। सेना के जवानों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर गार्ड ऑफ ऑनर दिया और शव परिजनों के सुपुर्द किया।बुधवार सुबह गांव के श्मशान घाट पर धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया।शहीद के छोटे भाई ने मुखाग्नि दी, इस दौरान पूरे गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों का जनसैलाब उमड़ा रहा। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।इंटर पास करने के बाद गोविंद सिंह यादव ने सेना की नौकरी जॉइन की थी। लगभग पांच साल पहले उनका विवाह हुआ था और उनकी करीब चार साल की एक बेटी है, जो अब पिता के साये से महरूम हो गई है। शहीद के पिता ने नम आंखों से बताया कि पहले उन्हें बेटे के घायल होने की खबर मिली थी, लेकिन शाम को उसका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। परिजनों ने कहा कि बेटे को खोने का गम हमेशा रहेगा, लेकिन गर्व है कि उसने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए।





