हमीरपुर जिले के मौदहा ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत सिसोलर इलाके का परसदवा डेरा गांव आज भी बुनियादी सुविधा—पक्की सड़क—से वंचित है। करीब 500 की आबादी वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए लगभग तीन किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता है, जो हल्की बारिश में ही दलदल में तब्दील हो जाता है। हालात ऐसे हैं कि बारिश के दिनों में गांव तक एंबुलेंस पहुंचना पूरी तरह असंभव हो जाता है।
फोटो - खराब पड़ी रोड
सड़क न होने की इस समस्या का खामियाजा ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। बीते दो दिनों के भीतर गांव में दो प्रसूताओं को बैलगाड़ी से अस्पताल ले जाना पड़ा। इनमें से एक प्रसूता ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दिया, जबकि दूसरी प्रसूता के नवजात की अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण मौत हो गई।
2 फरवरी की दोपहर गांव की मनीषा पत्नी लालाराम के एक माह के नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ गई। गांव तक कोई वाहन नहीं पहुंच पाने के कारण परिजनों को बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा। कीचड़ भरे रास्ते से निकलने में करीब साढ़े चार घंटे लग गए। जब बच्चे को सिसोलर अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया।
दूसरी घटना मंगलवार सुबह की है। कृष्ण कुमार की छोटी बहू को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। बारिश के कारण गांव का रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका था। मजबूरी में परिजन प्रसूता को बैलगाड़ी से अस्पताल ले जाने निकले, लेकिन रास्ता खराब होने के कारण देरी हुई और प्रसव रास्ते में ही हो गया। बाद में परिजन जच्चा-बच्चा को वापस घर ले आए और आशा कार्यकर्ता की मदद ली गई।
गांव के निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पिछले महीने एक सप्ताह तक क्रमिक अनशन किया था। तब प्रशासन ने सड़क बनवाने का आश्वासन देकर अनशन समाप्त कराया था। राजेंद्र का कहना है कि यदि समय रहते सड़क बन गई होती, तो नवजात को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और उसकी जान बच सकती थी।
इस मामले में मौदहा एसडीएम ने बताया कि परसदवा डेरा गांव तक सड़क निर्माण की जिम्मेदारी विकास निर्माण विभाग को दी गई है, जिसमें मनरेगा विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा।

