रिपोर्ट- ललित शर्मा
एक ही पंचायत, एक ही दिन में चार अलग-अलग कार्यों में मजदूरों की फर्जी हाजिरी, पुरुषों के नाम पर महिलाओं की मजदूरी निकासी जब्ती का केंद्र बनी सरकारी योजनामौदहा (हमीरपुर)।
हमीरपुर जिले के मौदहा ब्लॉक की सिसोलर ग्राम पंचायत MNREGA घोटाले के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उजागर हुई है, जहाँ सरकारी मजदूरी योजना के तहत भारी पैमाने पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। 1 अक्टूबर 2025 को चार अलग-अलग मस्टर रोल (मार्क नंबर 7218, 7219, 7220 व 7375) के नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) रिकॉर्ड्स से पता चला है कि एक ही दिन, एक ही पंचायत में मजदूरों के लिंग और फोटो में व्यवस्थित रूप से व्यापक अंतर पाई गई है।जांच में सामने आया है कि कहीं पुरुषों के नाम पर महिलाओं की फर्जी हाजिरी दर्ज कराई गई, तो कहीं हाजिरी में दिखाए गए मजदूरों से कहीं अधिक लोग फोटोज में दिखाई दिए। इससे स्पष्ट है कि काम के स्थल पर असली मजदूर थे ही नहीं, बल्कि फर्जी फोटो के आधार पर भुगतान किया गया।सचिव और APO की मिलीभगतयह पूरा खेल पंचायत सचिव और सहायक विकास अधिकारी (APO) की मिलीभगत से संभव हो रहा है। नकली हाजिरी लगाने के लिए मजदूरों के जॉब कार्ड का दुरुपयोग किया गया, जबकि असली मजदूर कहीं उपस्थिति दर्ज नहीं थे।जिला प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांगस्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मौदहा के सभी गांवों के मस्टर रोल और NMMS डेटा की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ मजदूरों के जेंडर और फोटो बल्कि जियो-टैग और टाइमस्टैम्प की भी सख्त जांच होना जरूरी है। दोषी पाए गए अफसरों और पंचायत सचिवों के विरुद्ध कठोर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए और फर्जी मजदूरी राशि तुरंत सरकारी खाते में वापस जमा कराई जाए।प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे मेंजब बीडीओ मौदहा से इस घोटाले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उनका फोन नहीं उठा। इस चुप्पी ने मामले को लेकर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।मौदहा विकासखंड में MNREGA जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में इस प्रकार की गड़बड़ी न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाती है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मजदूरों के हक को भी भारी नुकसान पहुँचाती है। इसके खिलाफ तत्काल जांच और जुर्मानी कार्रवाई अनिवार्य है।

