लखनऊ ।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव की राजनीति अब पूरी तरह से गरमा चुकी है। समाजवादी पार्टी ने बुधवार को शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पांच मजबूत प्रत्याशियों की सूची जारी कर प्रदेश की चुनावी किताब में नई कहानी लिख दी है। इस कदम से विपक्षी दलों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में सियासी महाभारत चरम पर पहुंचने की ओर बढ़ रहा है।सपा द्वारा घोषित उम्मीदवारों में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वाराणसी-मिर्जापुर के लाल बिहारी यादव और गोरखपुर-फैजाबाद के कमलेश शामिल हैं। वहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए इलाहाबाद-झांसी से डॉ. मान सिंह, वाराणसी-मिर्जापुर से आशुतोष सिन्हा और लखनऊ से कांति सिंह को टिकट मिला है। खास बात यह है कि तीन मौजूदा एमएलसी की पार्टी ने फिर से उम्मीदवारी दी है, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूती का पता चलता है। कांति सिंह, जो लखनऊ पब्लिक स्कूल की संस्थापक हैं और प्रतापगढ़ से सांसद एसपी सिंह की पत्नी हैं, इस बार भी अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार हैं। प्रदेश में फरवरी 2026 में होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए 11 सीटें खाली होंगी। इसके लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण और नामांकन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। शिक्षक और स्नातक दोनों वर्गों के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं और राजनीतिक दल इस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। सपा के प्रत्याशियों की घोषणा ने भाजपा समेत अन्य दलों की रणनीति में खलबली मचा दी है, जो अब अपने उम्मीदवार तय करने में लग गए हैं।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विधान परिषद चुनाव आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक मजबूत आरंभिक मुकाबला है। सपा ने समय से पहले अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर विपक्षी ताकतों को कड़ी चुनौती दी है। अब देखने वाली बात होगी कि भाजपा और अन्य पार्टियां इस चुनौती का कैसे सामना करती हैं और चुनावी रणभूमि में अपने कड़े दांव कौन लगाती हैं।यह चुनाव प्रदेश की राजनीति को दिशा देने वाला माना जा रहा है, जहां हर वोट का महत्व सर्वोपरि होगा। प्रदेश की जनता इस चुनाव में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर अपने प्रतिनिधि चुनने जा रही है, जिनसे वे स्थानीय और व्यापक दोनों ही स्तरों पर अपने हितों की रक्षा की उम्मीद रखते हैं।

